उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत असंत भेद बिलगाई। प्रनतपाल मोहि कहहु बुझाई।।
मूल पाठ
संत असंत भेद बिलगाई। प्रनतपाल मोहि कहहु बुझाई।।
संतन्ह के लच्छन सुनु भ्राता। अगनित श्रुति पुरान बिख्याता।।
स्रोत अभिलेख 7.37 · पुस्तक पृ. 945, 945
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे शरणागतका पालन करनेवाले! संत और असंतके भेद अलग-अलग करके मुझको समझाकर कहिये। [श्रीरामजीने कहा—] हे भाई! संतोंके लक्षण (गुण) असंख्य हैं, जो वेद और पुराणोंमें प्रसिद्ध हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 945 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संत असंत भेद बिलगाई। प्रनतपाल मोहि कहहु बुझाई।।
English explanation
O protector of those who seek refuge, clearly distinguish saints from the unvirtuous and explain the difference to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संतों | saints |
| असंत | असंतों; दुर्जनों | the unvirtuous; wicked people |
| भेद | अंतर | difference |
| बिलगाई | अलग-अलग स्पष्ट करके | clearly distinguishing |
| प्रनतपाल | हे शरणागतों के पालक | O protector of those who seek refuge |
| मोहि | मुझे | to me |
| कहहु | कहिए | please tell |
| बुझाई | समझाकर | with an explanation |
2 संतन्ह के लच्छन सुनु भ्राता। अगनित श्रुति पुरान बिख्याता।।
English explanation
Listen, brother, to the traits of saints: they are countless and are described in the Vedas and Puranas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संतन्ह | संतों | saints |
| के | के | of |
| लच्छन | लक्षण | traits |
| सुनु | सुनो | listen |
| भ्राता | हे भाई | O brother |
| अगनित | असंख्य | countless |
| श्रुति | वेदों में | in the Vedas |
| पुरान | पुराणों में | in the Puranas |
| बिख्याता | वर्णित; प्रसिद्ध | described; well known |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 945
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 945
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।