उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्रीमुख तुम्ह पुनि कीन्हि बड़ाई। तिन्ह पर प्रभुहि प्रीति अधिकाई।।
मूल पाठ
श्रीमुख तुम्ह पुनि कीन्हि बड़ाई। तिन्ह पर प्रभुहि प्रीति अधिकाई।।
सुना चहउँ प्रभु तिन्ह कर लच्छन। कृपासिंधु गुन ग्यान बिचच्छन।।
स्रोत अभिलेख 7.37 · पुस्तक पृ. 945, 945
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपने भी अपने श्रीमुखसे उनकी बड़ाई की है और उनपर प्रभु (आप) का प्रेम भी बहुत है। हे प्रभो! मैं उनके लक्षण सुनना चाहता हूँ। आप कृपाके समुद्र हैं और गुण तथा ज्ञानमें अत्यन्त निपुण हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 945 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 श्रीमुख तुम्ह पुनि कीन्हि बड़ाई। तिन्ह पर प्रभुहि प्रीति अधिकाई।।
English explanation
You too have praised them with your own revered lips; the Lord has great love for those saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीमुख | अपने पवित्र मुख से | with your revered lips |
| तुम्ह | आपने | you |
| पुनि | भी; फिर | also; again |
| कीन्हि | की है | have made |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| तिन्ह | उन संतों | those saints |
| पर | के प्रति | toward |
| प्रभुहि | प्रभु को | the Lord has |
| प्रीति | प्रेम | love |
| अधिकाई | बहुत अधिक | very great |
2 सुना चहउँ प्रभु तिन्ह कर लच्छन। कृपासिंधु गुन ग्यान बिचच्छन।।
English explanation
Lord, I wish to hear the distinguishing qualities of those saints. You are an ocean of compassion, discerning in virtue and knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुना | सुनना | to hear |
| चहउँ | मैं चाहता हूँ | I wish |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| तिन्ह | उन संतों | those saints |
| कर | के | of |
| लच्छन | लक्षण; पहचान के गुण | traits; distinguishing qualities |
| कृपासिंधु | हे कृपा के सागर | O ocean of compassion |
| गुन | गुणों में | in virtues |
| ग्यान | ज्ञान में | in knowledge |
| बिचच्छन | निपुण; विवेकशील | accomplished; discerning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 945
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 945
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।