उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करउँ कृपानिधि एक ढिठाई। मैं सेवक तुम्ह जन सुखदाई।।
मूल पाठ
करउँ कृपानिधि एक ढिठाई। मैं सेवक तुम्ह जन सुखदाई।।
संतन्ह कै महिमा रघुराई। बहु बिधि बेद पुरानन्ह गाई।।
स्रोत अभिलेख 7.37 · पुस्तक पृ. 945, 945
भावार्थ
मूल पाठ के बादतथापि हे कृपानिधान! मैं आपसे एक धृष्टता करता हूँ। मैं सेवक हूँ और आप सेवकको सुख देनेवाले हैं [इससे मेरी धृष्टताको क्षमा कीजिये और मेरे प्रश्रका उत्तर देकर सुख दीजिये]। हे रघुनाथजी! वेद-पुराणोंने संतोंकी महिमा बहुत प्रकारसे गायी है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 945 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करउँ कृपानिधि एक ढिठाई। मैं सेवक तुम्ह जन सुखदाई।।
English explanation
AI-draft interpretation: O treasure of compassion, let me venture one bold request. I am your servant, and you bring happiness to your devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करउँ | मैं करूँ | let me do |
| कृपानिधि | हे कृपा के भंडार | O treasure of compassion |
| एक | एक | one |
| ढिठाई | धृष्टता; साहसपूर्ण निवेदन | boldness; a bold request |
| मैं | मैं | I |
| सेवक | सेवक | servant |
| तुम्ह | आप | you |
| जन | अपने सेवकों या भक्तों को | to your servants or devotees |
| सुखदाई | सुख देने वाले | giver of happiness |
2 संतन्ह कै महिमा रघुराई। बहु बिधि बेद पुरानन्ह गाई।।
English explanation
O Rama, lord of the Raghu lineage, the Vedas and Puranas have sung the greatness of saints in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संतन्ह | संतों | saints |
| कै | की | of |
| महिमा | महिमा | greatness |
| रघुराई | हे रघुकुल के स्वामी राम | O Rama, lord of the Raghu lineage |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| बेद | वेदों ने | the Vedas |
| पुरानन्ह | पुराणों ने | the Puranas |
| गाई | गाई है | have sung |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 945
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 945
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।