उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिद्धि सिद्धि प्रेरइ बहु भाई। बुद्धहि लोभ दिखावहिं आई।।
मूल पाठ
रिद्धि सिद्धि प्रेरइ बहु भाई। बुद्धहि लोभ दिखावहिं आई।।
कल बल छल करि जाहिं समीपा। अंचल बात बुझावहिं दीपा।।
स्रोत अभिलेख 7.118 · पुस्तक पृ. 1028, 1029
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे भाई! वह बहुत-सी ऋद्धि-सिद्धियोंको भेजती है, जो आकर बुद्धिको लोभ दिखाती हैं। और वे ऋद्धि-सिद्धियाँ कल (कला), बल और छल करके समीप जाती और आँचलकी वायुसे उस ज्ञानरूपी दीपकको बुझा देती हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1028 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रिद्धि सिद्धि प्रेरइ बहु भाई। बुद्धहि लोभ दिखावहिं आई।।
English explanation
Brother, Maya sends many forms of prosperity and supernatural accomplishment; they approach and tempt the intellect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिद्धि | समृद्धियाँ | forms of prosperity |
| सिद्धि | अलौकिक शक्तियाँ | supernatural attainments |
| प्रेरइ | प्रेरित करके भेजती है | urges forth |
| बहु | अनेक | many |
| भाई | हे भाई | O brother |
| बुद्धहि | बुद्धि को | to the intellect |
| लोभ | प्रलोभन | temptation |
| दिखावहिं | दिखाती हैं | present |
| आई | आकर | having approached |
2 कल बल छल करि जाहिं समीपा। अंचल बात बुझावहिं दीपा।।
English explanation
Using contrivance, force, and deception, they draw near and extinguish the lamp with the breeze from their garments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कल | युक्ति | contrivance |
| बल | बल | force |
| छल | धोखा | deception |
| करि | करके | employing |
| जाहिं | जाती हैं | go |
| समीपा | पास | near |
| अंचल | आँचल की | from the loose end of a garment |
| बात | हवा | breeze |
| बुझावहिं | बुझाती हैं | extinguish |
| दीपा | दीपक को | the lamp |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1028
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1028, 1029
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।