उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छोरन ग्रंथि पाव जौं सोई। तब यह जीव कृतारथ होई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयदि वह (विज्ञानरूपिणी बुद्धि) उस गाँठको खोलने पावे, तब यह जीव कृतार्थ हो। परन्तु हे पक्षिराज गरुडज़ी! गाँठ खोलते हुए जानकर माया फिर अनेकों विघ्र करती है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1028 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
छोरन ग्रंथि पाव जौं सोई। तब यह जीव कृतारथ होई।।
छोरत ग्रंथि जानि खगराया। बिघ्न अनेक करइ तब माया।।
स्रोत अभिलेख 7.118 · पुस्तक पृ. 1028, 1029
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 छोरन ग्रंथि पाव जौं सोई। तब यह जीव कृतारथ होई।।
English explanation
If that intellect succeeds in untying the knot, this individual soul attains fulfillment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छोरन | खोलने में | in untying |
| ग्रंथि | गाँठ | the knot |
| पाव | सफल हो सके | can succeed |
| जौं | यदि | if |
| सोई | वही बुद्धि | that same intellect |
| तब | तो | then |
| यह | यह | this |
| जीव | व्यक्तिगत आत्मा | individual soul |
| कृतारथ | लक्ष्य सिद्ध करने वाला | fulfilled |
| होई | हो जाता है | becomes |
2 छोरत ग्रंथि जानि खगराया। बिघ्न अनेक करइ तब माया।।
English explanation
O Garuda, king of birds, when Maya recognizes that the knot is being untied, she creates many obstacles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छोरत | खोलते हुए | being untied |
| ग्रंथि | गाँठ को | the knot |
| जानि | जानकर | recognizing |
| खगराया | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| बिघ्न | बाधाएँ | obstacles |
| अनेक | बहुत-सी | many |
| करइ | उत्पन्न करती है | creates |
| तब | तब | then |
| माया | माया, भ्रमकारी शक्ति | Maya, the deluding power |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1028
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1028, 1029
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।