उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रबल अबिद्या कर परिवारा। मोह आदि तम मिटइ अपारा।।
मूल पाठ
प्रबल अबिद्या कर परिवारा। मोह आदि तम मिटइ अपारा।।
तब सोइ बुद्धि पाइ उँजिआरा। उर गृहँ बैठि ग्रंथि निरुआरा।।
स्रोत अभिलेख 7.118 · पुस्तक पृ. 1028, 1029
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर महान् बलवती अविद्याके परिवार मोह आदिका अपार अन्धकार मिट जाता है। तब वही (विज्ञानरूपिणी) बुद्धि [आत्मानुभवरूप] प्रकाशको पाकर हृदयरूपी घरमें बैठकर उस जड़- चेतनकी गाँठको खोलती है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1028 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रबल अबिद्या कर परिवारा। मोह आदि तम मिटइ अपारा।।
English explanation
The vast darkness of delusion and the other members of powerful ignorance’s family disappears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रबल | शक्तिशाली | powerful |
| अबिद्या | आत्मस्वरूप का अज्ञान | ignorance of the true self |
| कर | का | of |
| परिवारा | परिवार | family of associated tendencies |
| मोह | मोह | delusion |
| आदि | और अन्य | and the rest |
| तम | अंधकार | darkness |
| मिटइ | मिट जाता है | disappears |
| अपारा | असीम | immense |
2 तब सोइ बुद्धि पाइ उँजिआरा। उर गृहँ बैठि ग्रंथि निरुआरा।।
English explanation
Then that intellect, receiving illumination, sits within the house of the heart and works to unravel the knot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सोइ | वही | that same |
| बुद्धि | विवेकशील बुद्धि | discerning intellect |
| पाइ | पाकर | having received |
| उँजिआरा | उजाला | illumination |
| उर | हृदय-रूपी | of the heart |
| गृहँ | घर में | in the house |
| बैठि | बैठकर | sitting |
| ग्रंथि | बंधन की गाँठ | knot of bondage |
| निरुआरा | सुलझाती है | works to unravel |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1028
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1028, 1029
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