उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
होइ बुद्धि जौं परम सयानी। तिन्ह तन चितव न अनहित जानी।।
मूल पाठ
होइ बुद्धि जौं परम सयानी। तिन्ह तन चितव न अनहित जानी।।
जौं तेहि बिघ्न बुद्धि नहिं बाधी। तौ बहोरि सुर करहिं उपाधी।।
स्रोत अभिलेख 7.118 · पुस्तक पृ. 1028, 1029
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि बुद्धि बहुत ही सयानी हुई, तो वह उन (ऋद्धि-सिद्धियों) को अहितकर (हानिकर) समझकर उनकी ओर ताकती नहीं। इस प्रकार यदि मायाके विघ्रोंसे बुद्धिको बाधा न हुई, तो फिर देवता उपाधि (विघ्र) करते हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1028 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 होइ बुद्धि जौं परम सयानी। तिन्ह तन चितव न अनहित जानी।।
English explanation
If the intellect is exceedingly wise, it recognizes them as harmful and does not look toward them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइ | हो | is |
| बुद्धि | बुद्धि | the intellect |
| जौं | यदि | if |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| सयानी | समझदार | wise |
| तिन्ह | उनके | their |
| तन | शरीर अथवा रूप की ओर | toward their bodily forms |
| चितव | देखती है | looks |
| न | नहीं | not |
| अनहित | अहितकारी | harmful |
| जानी | जानकर | recognizing as |
2 जौं तेहि बिघ्न बुद्धि नहिं बाधी। तौ बहोरि सुर करहिं उपाधी।।
English explanation
If that obstacle does not impede the intellect, the gods then create further trouble.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| तेहि | उससे | by that |
| बिघ्न | विघ्न | obstacle |
| बुद्धि | बुद्धि | the intellect |
| नहिं | नहीं | not |
| बाधी | बाधित हुई | is impeded |
| तौ | तो | then |
| बहोरि | फिर | again |
| सुर | देवता | the gods |
| करहिं | करते हैं | create |
| उपाधी | उपद्रव | disturbance |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1028
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1028, 1029
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