उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इंद्रीं द्वार झरोखा नाना। तहँ तहँ सुर बैठे करि थाना।।
मूल पाठ
इंद्रीं द्वार झरोखा नाना। तहँ तहँ सुर बैठे करि थाना।।
आवत देखहिं बिषय बयारी। ते हठि देही कपाट उघारी।।
स्रोत अभिलेख 7.118 · पुस्तक पृ. 1028, 1029
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन्द्रियोंके द्वार हृदयरूपी घरके अनेकों झरोखे हैं। वहाँ-वहाँ (प्रत्येक झरोखेपर) देवता थाना किये (अड्डा जमाकर) बैठे हैं। ज्यों ही वे विषयरूपी हवाको आते देखते हैं त्यों ही हठपूर्वक किवाड़ खोल देते हैं॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1028 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 इंद्रीं द्वार झरोखा नाना। तहँ तहँ सुर बैठे करि थाना।।
English explanation
The senses are the various doors and windows; at each, the gods sit established at their posts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इंद्रीं | इंद्रियाँ | the senses |
| द्वार | दरवाजे | doors |
| झरोखा | खिड़कियाँ | windows |
| नाना | अनेक प्रकार के | various |
| तहँ | वहाँ | there |
| तहँ | हर ऐसे स्थान पर | at each such place |
| सुर | इंद्रियों के अधिष्ठाता देवता | gods presiding over the senses |
| बैठे | बैठे हैं | are seated |
| करि | बनाकर | having established |
| थाना | ठिकाना | a post |
2 आवत देखहिं बिषय बयारी। ते हठि देही कपाट उघारी।।
English explanation
When they see the breeze of sense objects approaching, they insistently throw open the shutters.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आती हुई | approaching |
| देखहिं | देखते हैं | see |
| बिषय | इंद्रिय-विषयों की | of sense objects |
| बयारी | हवा | breeze |
| ते | वे देवता | those gods |
| हठि | हठपूर्वक | insistently |
| देही | देते हैं | proceed to |
| कपाट | दरवाजों के पल्ले | shutters |
| उघारी | खोलकर | opening |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1028
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1028, 1029
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