उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सिंधु घन सज्जन धीरा। चंदन तरु हरि संत समीरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजी समुद्र हैं तो धीर संत पुरुष मेघ हैं। श्रीहरि चन्दनके वृक्ष हैं तो संत पवन हैं। सब साधनोंका फल सुन्दर हरिभक्ति ही है। उसे संतके बिना किसीने नहीं पाया॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1032 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम सिंधु घन सज्जन धीरा। चंदन तरु हरि संत समीरा।।
सब कर फल हरि भगति सुहाई। सो बिनु संत न काहूँ पाई।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सिंधु घन सज्जन धीरा। चंदन तरु हरि संत समीरा।।
English explanation
Rama is the ocean and steadfast good people are clouds; Hari is the sandalwood tree and saints are the breeze.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| सिंधु | समुद्र | ocean |
| घन | बादल | clouds |
| सज्जन | सज्जन लोग | good people |
| धीरा | धीर, स्थिरचित्त | steadfast |
| चंदन | चंदन का | sandalwood |
| तरु | वृक्ष | tree |
| हरि | भगवान हरि, यहाँ राम | Lord Hari, here Rama |
| संत | संत | saints |
| समीरा | हवा | breeze |
2 सब कर फल हरि भगति सुहाई। सो बिनु संत न काहूँ पाई।।
English explanation
The fruit of all is beautiful devotion to Hari; no one has obtained it without saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सबका | all |
| कर | का | of |
| फल | फल | fruit, result |
| हरि | भगवान हरि की | to Lord Hari |
| भगति | भक्ति | devotion |
| सुहाई | सुंदर, मनोहर | beautiful |
| सो | वह भक्ति | that devotion |
| बिनु | के बिना | without |
| संत | संतों | saints |
| न | नहीं | not |
| काहूँ | किसी ने | anyone |
| पाई | प्राप्त की | has obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1032
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
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