उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिचारि जोइ कर सतसंगा। राम भगति तेहि सुलभ बिहंगा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा विचारकर जो भी संतोंका संग करता है, हे गरुडज़ी! उसके लिये श्रीरामजीकी भक्ति सुलभ हो जाती है॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1032 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस बिचारि जोइ कर सतसंगा। राम भगति तेहि सुलभ बिहंगा।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस बिचारि जोइ कर सतसंगा। राम भगति तेहि सुलभ बिहंगा।।
English explanation
O Garuda, devotion to Rama becomes readily attainable for whoever, reflecting thus, keeps holy company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| जोइ | जो कोई | whoever |
| कर | करता है | practices |
| सतसंगा | संतों की संगति | holy company |
| राम | भगवान राम की | to Lord Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| तेहि | उसके लिए | for that person |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily attainable |
| बिहंगा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1032
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।