उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो प्राणी उसे प्रेमके साथ खोजता है, वह सब सुखोंकी खान इस भक्तिरूपी मणिको पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मनमें तो ऐसा विश्वास है कि श्रीरामजीके दास श्रीरामजीसे भी बढ़कर हैं॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1032 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी।।
मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा।।
स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी।।
English explanation
Whoever searches with heartfelt devotion obtains the jewel of devotion, the mine of every happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाव | श्रद्धाभाव | heartfelt devotion |
| सहित | के साथ | with |
| खोजइ | खोजता है | searches |
| जो | जो | whoever |
| प्रानी | प्राणी | person |
| पाव | पाता है | obtains |
| भगति | भक्ति रूपी | of devotion |
| मनि | मणि | jewel |
| सब | सभी | all |
| सुख | सुखों की | of happiness |
| खानी | खान | mine, abundant source |
2 मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा।।
English explanation
My lord, I hold this conviction in my heart: Rama's servant is even greater than Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरें | मेरे | my |
| मन | मन में | in the heart |
| प्रभु | हे प्रभु | my lord |
| अस | ऐसा | such |
| बिस्वासा | विश्वास | conviction |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| ते | से | than |
| अधिक | बढ़कर | greater |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कर | का | of |
| दासा | सेवक, भक्त | servant, devotee |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1032
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।