उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम राज बैंठें त्रेलोका। हरषित भए गए सब सोका।।
मूल पाठ
राम राज बैंठें त्रेलोका। हरषित भए गए सब सोका।।
बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप बिषमता खोई।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 930, 930
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीके राज्यपर प्रतिष्ठित होनेपर तीनों लोक हॢषत हो गये, उनके सारे शोक जाते रहे। कोई किसीसे वैर नहीं करता। श्रीरामचन्द्रजीके प्रतापसे सबकी विषमता (आन्तरिक भेदभाव) मिट गयी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 930 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम राज बैंठें त्रेलोका। हरषित भए गए सब सोका।।
English explanation
When Rama took the throne, the three worlds rejoiced and all sorrows vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| राज | राजसिंहासन पर | on the throne |
| बैंठें | बैठने पर | upon taking his seat |
| त्रेलोका | तीनों लोक | the three worlds |
| हरषित | आनंदित | joyful |
| भए | हुए | became |
| गए | दूर हो गए | vanished |
| सब | सभी | all |
| सोका | शोक | sorrows |
2 बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप बिषमता खोई।।
English explanation
No one bears enmity toward anyone; through Rama’s power, discord and inequality disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बयरु | वैर | enmity |
| न | नहीं | not |
| कर | करता | practices |
| काहू | किसी के | anyone |
| सन | साथ | with |
| कोई | कोई भी | anyone |
| राम | राम के | Rama’s |
| प्रताप | प्रताप से | through power and majesty |
| बिषमता | विषमता और आपसी भेदभाव | discord and inequality |
| खोई | मिट गई | disappeared |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 930
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 930, 930
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।