उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरन नलिन उर धरि गृह आवा। प्रभु सुभाउ परिजनन्हि सुनावा।।
मूल पाठ
चरन नलिन उर धरि गृह आवा। प्रभु सुभाउ परिजनन्हि सुनावा।।
रघुपति चरित देखि पुरबासी। पुनि पुनि कहहिं धन्य सुखरासी।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 930, 930
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर भगवान्के चरणकमलोंको हृदयमें रखकर वह घर आया और आकर अपने कुटुम्बियोंको उसने प्रभुका स्वभाव सुनाया। श्रीरघुनाथजीका यह चरित्र देखकर अवधपुरवासी बार-बार कहते हैं कि सुखकी राशि श्रीरामचन्द्रजी धन्य हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 930 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चरन नलिन उर धरि गृह आवा। प्रभु सुभाउ परिजनन्हि सुनावा।।
English explanation
Holding Rama’s lotus-like feet in his heart, the Nishada king came home and told his family about the Lord’s disposition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरण | feet |
| नलिन | कमल जैसे | lotus-like |
| उर | हृदय में | in the heart |
| धरि | धारण करके | having held |
| गृह | घर | home |
| आवा | आए | he came |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| सुभाउ | स्वभाव | disposition |
| परिजनन्हि | परिजनों को | to his family members |
| सुनावा | सुनाया | recounted |
2 रघुपति चरित देखि पुरबासी। पुनि पुनि कहहिं धन्य सुखरासी।।
English explanation
Seeing Rama’s conduct, the townspeople repeatedly say, ‘Blessed is Rama, the abundance of joy!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम का | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| चरित | आचरण | conduct |
| देखि | देखकर | having seen |
| पुरबासी | नगरवासी | townspeople |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| धन्य | धन्य हैं | blessed indeed |
| सुखरासी | सुख की राशि राम | Rama, the abundance of joy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 930
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 930, 930
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।