उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह मम सखा भरत सम भ्राता। सदा रहेहु पुर आवत जाता।।
मूल पाठ
तुम्ह मम सखा भरत सम भ्राता। सदा रहेहु पुर आवत जाता।।
बचन सुनत उपजा सुख भारी। परेउ चरन भरि लोचन बारी।।
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 930, 930
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम मेरे मित्र हो और भरतके समान भाई हो। अयोध्यामें सदा आते-जाते रहना। यह वचन सुनते ही उसको भारी सुख उत्पन्न हुआ। नेत्रोंमें [आनन्द और प्रेमके आँसुओंका] जल भरकर वह चरणोंमें गिर पड़ा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 930 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुम्ह मम सखा भरत सम भ्राता। सदा रहेहु पुर आवत जाता।।
English explanation
You are my friend and a brother like Bharata. Always keep coming to and going from the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| मम | मेरे | my |
| सखा | मित्र | friend |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| सम | के समान | like |
| भ्राता | भाई | brother |
| सदा | सदा | always |
| रहेहु | रहना | keep on |
| पुर | नगर अयोध्या में | to and from Ayodhya |
| आवत | आते | coming |
| जाता | जाते | going |
2 बचन सुनत उपजा सुख भारी। परेउ चरन भरि लोचन बारी।।
English explanation
Hearing these words, the Nishada king felt great joy. With his eyes filled with tears, he fell at Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन | words |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| सुख | आनंद | joy |
| भारी | बहुत बड़ा | great |
| परेउ | गिर पड़े | he fell |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| भरि | भरकर | filling |
| लोचन | आँखों में | the eyes |
| बारी | आँसू | tears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 930
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 930, 930
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।