उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम भगति पथ परम प्रबीना। ग्यानी गुन गृह बहु कालीना।।
मूल पाठ
राम भगति पथ परम प्रबीना। ग्यानी गुन गृह बहु कालीना।।
राम कथा सो कहइ निरंतर। सादर सुनहिं बिबिध बिहंगबर।।
स्रोत अभिलेख 7.62 · पुस्तक पृ. 966, 966
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे रामभक्तिके मार्गमें परम प्रवीण हैं, ज्ञानी हैं, गुणोंके धाम हैं और बहुत कालके हैं। वे निरन्तर श्रीरामचन्द्रजीकी कथा कहते रहते हैं, जिसे भाँति-भाँतिके श्रेष्ठ पक्षी आदरसहित सुनते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 966 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम भगति पथ परम प्रबीना। ग्यानी गुन गृह बहु कालीना।।
English explanation
He is highly adept in the path of devotion to Rama, wise, an abode of virtues, and of great antiquity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम की | to Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| पथ | मार्ग में | in the path |
| परम | अत्यंत | supremely |
| प्रबीना | निपुण | adept |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
| गुन | सद्गुणों का | of virtues |
| गृह | घर; भंडार | abode; repository |
| बहु | बहुत | very; much |
| कालीना | दीर्घकाल से जीवित | long-lived; ancient |
2 राम कथा सो कहइ निरंतर। सादर सुनहिं बिबिध बिहंगबर।।
English explanation
He continually tells Rama’s story, and various noble birds listen respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम की | of Rama |
| कथा | कथा | story |
| सो | वे, काकभुसुंडि | he, Kakabhushundi |
| कहइ | कहते हैं | tells |
| निरंतर | निरंतर | continually |
| सादर | आदर सहित | respectfully |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| बिबिध | विभिन्न प्रकार के | of various kinds |
| बिहंगबर | श्रेष्ठ पक्षी | noble birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 966
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 966, 966
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