उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिलहिं न रघुपति बिनु अनुरागा। किएँ जोग तप ग्यान बिरागा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबिना प्रेमके केवल योग, तप, ज्ञान और वैराग्यादिके करनेसे श्रीरघुनाथजी नहीं मिलते। [अतएव तुम सत्संगके लिये वहाँ जाओ जहाँ] उत्तर दिशामें एक सुन्दर नील पर्वत है। वहाँ परम सुशील काकभुशुण्डिजी रहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 966 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मिलहिं न रघुपति बिनु अनुरागा। किएँ जोग तप ग्यान बिरागा।।
उत्तर दिसि सुंदर गिरि नीला। तहँ रह काकभुसुंडि सुसीला।।
स्रोत अभिलेख 7.62 · पुस्तक पृ. 966, 966
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मिलहिं न रघुपति बिनु अनुरागा। किएँ जोग तप ग्यान बिरागा।।
English explanation
Even with the practice of yoga, austerity, knowledge, and dispassion, Rama is not attained without love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलहिं | मिलते हैं; प्राप्त होते हैं | are attained |
| न | नहीं | not |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| बिनु | बिना | without |
| अनुरागा | प्रेम के | loving devotion |
| किएँ | करने पर भी | even when practiced |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| तप | तपस्या | austerity |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान | spiritual knowledge |
| बिरागा | वैराग्य | dispassion |
2 उत्तर दिसि सुंदर गिरि नीला। तहँ रह काकभुसुंडि सुसीला।।
English explanation
In the north stands the beautiful Blue Mountain; the virtuous crow-sage Kakabhushundi lives there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उत्तर | उत्तर | north |
| दिसि | दिशा में | in the direction |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| नीला | नील नाम का; नीला | called Blue; blue |
| तहँ | वहाँ | there |
| रह | रहते हैं | dwells |
| काकभुसुंडि | काकभुसुंडि, कौए के रूप में रामभक्त ज्ञानी | Kakabhushundi, a wise devotee of Rama in crow form |
| सुसीला | सुशील; अच्छे स्वभाव वाले | virtuous; good-natured |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 966
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 966, 966
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।