उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जाइ सुनहु तहँ हरि गुन भूरी। होइहि मोह जनित दुख दूरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवहाँ जाकर श्रीहरिके गुणसमूहोंको सुनो। उनके सुननेसे मोहसे उत्पन्न तुम्हारा दु:ख दूर हो जायगा। मैंने उसे जब सब समझाकर कहा, तब वह मेरे चरणोंमें सिर नवाकर हॢषत होकर चला गया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 966 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जाइ सुनहु तहँ हरि गुन भूरी। होइहि मोह जनित दुख दूरी।।
मैं जब तेहि सब कहा बुझाई। चलेउ हरषि मम पद सिरु नाई।।
स्रोत अभिलेख 7.62 · पुस्तक पृ. 966, 966
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जाइ सुनहु तहँ हरि गुन भूरी। होइहि मोह जनित दुख दूरी।।
English explanation
Go there and hear Hari’s many virtues; the suffering born of delusion will pass away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone |
| सुनहु | सुनो | listen |
| तहँ | वहाँ | there |
| हरि | भगवान हरि के | of Lord Hari |
| गुन | गुण | virtues |
| भूरी | बहुत-से | many; abundant |
| होइहि | हो जाएगा | will become |
| मोह | मोह से | from delusion |
| जनित | उत्पन्न | born; caused |
| दुख | दुःख | suffering |
| दूरी | दूर | removed |
2 मैं जब तेहि सब कहा बुझाई। चलेउ हरषि मम पद सिरु नाई।।
English explanation
When I explained all this to him, he bowed his head at my feet and departed joyfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैंने, शिव ने | I, Shiva |
| जब | जब | when |
| तेहि | उसे, गरुड़ को | to him, Garuda |
| सब | सब कुछ | everything |
| कहा | कहा | said |
| बुझाई | समझाकर | having explained |
| चलेउ | चला गया | departed |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| मम | मेरे | my |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 966
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 966, 966
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।