उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ताते उमा न मैं समुझावा। रघुपति कृपाँ मरमु मैं पावा।।
मूल पाठ
ताते उमा न मैं समुझावा। रघुपति कृपाँ मरमु मैं पावा।।
होइहि कीन्ह कबहुँ अभिमाना। सो खौवै चह कृपानिधाना।।
स्रोत अभिलेख 7.62 · पुस्तक पृ. 966, 966
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे उमा! मैंने उसको इसीलिये नहीं समझाया कि मैं श्रीरघुनाथजीकी कृपासे उसका मर्म (भेद) पा गया था। उसने कभी अभिमान किया होगा, जिसको कृपानिधान श्रीरामजी नष्ट करना चाहते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 966 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ताते उमा न मैं समुझावा। रघुपति कृपाँ मरमु मैं पावा।।
English explanation
Uma, that is why I did not myself explain matters to dispel his delusion; through Rama’s grace I had understood the underlying reason.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसीलिए | for that reason |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| न | नहीं | not |
| मैं | मैंने, शिव ने | I, Shiva |
| समुझावा | समझाया | explained |
| रघुपति | श्रीराम की | of Rama |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| मरमु | मर्म; भीतर का कारण | the underlying reason |
| मैं | मैंने | I |
| पावा | जाना; प्राप्त किया | understood; gained |
2 होइहि कीन्ह कबहुँ अभिमाना। सो खौवै चह कृपानिधाना।।
English explanation
He must have become proud at some time; Rama, the treasury of compassion, wishes to remove that pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइहि | होगा | must have |
| कीन्ह | किया | done; felt |
| कबहुँ | कभी | at some time |
| अभिमाना | अभिमान | pride |
| सो | उस अभिमान को | that pride |
| खौवै | मिटाना | to eliminate |
| चह | चाहते हैं | wishes |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार श्रीराम | Rama, the treasury of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 966
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 966, 966
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।