उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कछु तेहि ते पुनि मैं नहिं राखा। समुझइ खग खगही कै भाषा।।
मूल पाठ
कछु तेहि ते पुनि मैं नहिं राखा। समुझइ खग खगही कै भाषा।।
प्रभु माया बलवंत भवानी। जाहि न मोह कवन अस ग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 7.62 · पुस्तक पृ. 966, 966
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर कुछ इस कारण भी मैंने उसको अपने पास नहीं रखा कि पक्षी पक्षीकी ही बोली समझते हैं। हे भवानी! प्रभुकी माया [बड़ी ही] बलवती है, ऐसा कौन ज्ञानी है, जिसे वह न मोह ले?॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 966 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कछु तेहि ते पुनि मैं नहिं राखा। समुझइ खग खगही कै भाषा।।
English explanation
Partly for that reason too, I did not hold him back; a bird understands another bird’s language.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछु | कुछ हद तक | partly |
| तेहि | उसी कारण | that reason |
| ते | से | because of |
| पुनि | भी; फिर | also; further |
| मैं | मैंने | I |
| नहिं | नहीं | not |
| राखा | रोका | held back |
| समुझइ | समझता है | understands |
| खग | पक्षी | a bird |
| खगही | पक्षी ही की | of another bird itself |
| कै | की | of |
| भाषा | भाषा | language |
2 प्रभु माया बलवंत भवानी। जाहि न मोह कवन अस ग्यानी।।
English explanation
Bhavani, the Lord’s maya is powerful; what wise person is there who is untouched by delusion?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु की | the Lord’s |
| माया | माया; मोह उत्पन्न करने वाली शक्ति | maya; illusion-producing power |
| बलवंत | प्रबल | powerful |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, Parvati |
| जाहि | जिसे | to whom |
| न | नहीं | not |
| मोह | मोह हो | delusion occurs |
| कवन | कौन | who; what |
| अस | ऐसा | such |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 966
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 966, 966
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।