उत्तरकाण्ड · दोहा 62 (क) · दोहा
ग्यानी भगत सिरोमनि त्रिभुवनपति कर जान।
ग्यानी भगत सिरोमनि त्रिभुवनपति कर जान।
ताहि मोह माया नर पावँर करहिं गुमान॥ ६२ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.62 · पुस्तक पृ. 966, 966
भावार्थ और शब्दार्थ
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1ग्यानी भगत सिरोमनि त्रिभुवनपति कर जान।
वे ज्ञानी, भक्तों में श्रेष्ठ और तीनों लोकों के स्वामी भगवान के वाहन गरुड़ हैं।
English explanation
Garuda is wise, foremost among devotees, and the mount of the Lord of the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यानी | ज्ञानी; तत्त्वज्ञान रखने वाले | wise; possessing spiritual knowledge |
| भगत | भक्तों में | among devotees |
| सिरोमनि | शिरोमणि; सबसे श्रेष्ठ | the foremost; the crown jewel |
| त्रिभुवनपति | तीनों लोकों के स्वामी भगवान | the Lord of the three worlds |
| कर | के | of |
| जान | वाहन; यहाँ गरुड़ | mount; here, Garuda |
2ताहि मोह माया नर पावँर करहिं गुमान॥ ६२ (क)॥
तुच्छ मनुष्य मान बैठते हैं कि माया उन्हें भी मोह में डालती है।
English explanation
Foolish people presume that maya deludes even him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताहि | उन्हें; उन गरुड़ को | him; that Garuda |
| मोह | मोह; भ्रम में पड़ना | delusion; being bewildered |
| माया | माया; मोह उत्पन्न करने वाली शक्ति | maya; the power producing delusion |
| नर | मनुष्य | people |
| पावँर | तुच्छ, मूर्ख | base; foolish |
| करहिं | करते हैं | make; entertain |
| गुमान | अनुमान; धारणा | a supposition; a presumption |
| क | दोहा ६२ का संदर्भ-चिह्न ‘क’ | reference marker ‘क’ for verse 62 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 62 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.62
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 966, 966
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