उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम उपासक जे जग माहीं। एहि सम प्रिय तिन्ह के कछु नाहीं।।
मूल पाठ
राम उपासक जे जग माहीं। एहि सम प्रिय तिन्ह के कछु नाहीं।।
रघुपति कृपाँ जथामति गावा। मैं यह पावन चरित सुहावा।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 1044, 1047
भावार्थ
मूल पाठ के बादजगत्में जो (जितने भी) रामोपासक हैं, उनको तो इस रामकथाके समान कुछ भी प्रिय नहीं है। श्रीरघुनाथजीकी कृपासे मैंने यह सुन्दर और पवित्र करनेवाला चरित्र अपनी बुद्धिके अनुसार गाया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1044 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम उपासक जे जग माहीं। एहि सम प्रिय तिन्ह के कछु नाहीं।।
English explanation
For those in the world who worship Rama, nothing else is as dear as this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| उपासक | भक्त, आराधक | worshippers |
| जे | जो | who |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| एहि | इस संवाद के | this dialogue |
| सम | समान | equal to |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| तिन्ह | उन | those devotees |
| के | को | to |
| कछु | कुछ भी | anything |
| नाहीं | नहीं | not |
2 रघुपति कृपाँ जथामति गावा। मैं यह पावन चरित सुहावा।।
English explanation
By Rama’s grace, I have sung this sacred, lovely account according to my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कृपाँ | कृपा से | by grace |
| जथामति | अपनी बुद्धि के अनुसार | according to my understanding |
| गावा | गाया | sang |
| मैं | मैंने | I |
| यह | यह | this |
| पावन | पवित्र | sacred |
| चरित | जीवन-कथा | account of deeds |
| सुहावा | सुंदर, मनोहर | lovely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1044
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1044, 1047
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