उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहिं कलिकाल न साधन दूजा। जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा।।
मूल पाठ
एहिं कलिकाल न साधन दूजा। जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा।।
रामहि सुमिरिअ गाइअ रामहि। संतत सुनिअ राम गुन ग्रामहि।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 1044, 1047
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[तुलसीदासजी कहते हैं—] इस कलिकालमें योग, यज्ञ, जप, तप, व्रत और पूजन आदि कोई दूसरा साधन नहीं है। बस, श्रीरामजीका ही स्मरण करना, श्रीरामजीका ही गुण गाना और निरन्तर श्रीरामजीके ही गुणसमूहोंको सुनना चाहिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1045 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहिं कलिकाल न साधन दूजा। जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा।।
English explanation
In this age of Kali there is no other means—not yoga, sacrifice, chanting, austerity, vows, or ritual worship; the following line prescribes remembrance of Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहिं | इस | this |
| कलिकाल | कलियुग में | in the age of Kali |
| न | नहीं | no |
| साधन | आध्यात्मिक उपाय | spiritual means |
| दूजा | दूसरा | other |
| जोग | योग | yogic practice |
| जग्य | यज्ञ | sacrificial rites |
| जप | मंत्र या नाम का जप | repeated recitation |
| तप | तपस्या | austerity |
| ब्रत | धार्मिक व्रत | religious vows |
| पूजा | अनुष्ठानिक पूजा | ritual worship |
2 रामहि सुमिरिअ गाइअ रामहि। संतत सुनिअ राम गुन ग्रामहि।।
English explanation
Remember Rama, sing of Rama, and continually listen to his many virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को ही | Rama himself |
| सुमिरिअ | स्मरण करें | remember |
| गाइअ | गाएँ | sing of |
| रामहि | राम को ही | Rama himself |
| संतत | निरंतर | continually |
| सुनिअ | सुनें | listen to |
| राम | राम के | Rama’s |
| गुन | गुणों का | virtues |
| ग्रामहि | समूह | multitude |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1045
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1044, 1047
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।