उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु पतित पावन बड़ बाना। गावहिं कबि श्रुति संत पुराना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपतितोंको पवित्र करना जिनका महान् (प्रसिद्ध) बाना है—ऐसा कवि, वेद, संत और पुराण गाते हैं—रे मन! कुटिलता त्यागकर उन्हींको भज। श्रीरामको भजनेसे किसने परम गति नहीं पायी?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1045 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जासु पतित पावन बड़ बाना। गावहिं कबि श्रुति संत पुराना।।
ताहि भजहि मन तजि कुटिलाई। राम भजें गति केहिं नहिं पाई।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 1044, 1047
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जासु पतित पावन बड़ बाना। गावहिं कबि श्रुति संत पुराना।।
English explanation
Whose great pledge to purify the fallen is sung by poets, the Vedas, saints, and the Puranas—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनका | whose |
| पतित | पतन को प्राप्त लोगों को | the fallen |
| पावन | पवित्र करने का | purifying |
| बड़ | महान | great |
| बाना | प्रण, विरद | pledge, defining commitment |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| कबि | कवि | poets |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| संत | संत | saints |
| पुराना | पुराण | the Puranas |
2 ताहि भजहि मन तजि कुटिलाई। राम भजें गति केहिं नहिं पाई।।
English explanation
O mind, abandon crookedness and worship him. Who has failed to attain liberation by worshipping Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताहि | उन्हीं राम को | that very Rama |
| भजहि | भज, आराधना कर | worship |
| मन | हे मन | O mind |
| तजि | छोड़कर | abandoning |
| कुटिलाई | कपट, टेढ़ापन | deceit, crookedness |
| राम | राम को | Rama |
| भजें | भजने से | through worshipping |
| गति | मुक्ति, परम गंतव्य | liberation, ultimate destination |
| केहिं | किसने | who |
| नहिं | नहीं | not |
| पाई | प्राप्त की | attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1045
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1044, 1047
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