उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह सुभ संभु उमा संबादा। सुख संपादन समन बिषादा।।
मूल पाठ
यह सुभ संभु उमा संबादा। सुख संपादन समन बिषादा।।
भव भंजन गंजन संदेहा। जन रंजन सज्जन प्रिय एहा।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 1044, 1047
भावार्थ
मूल पाठ के बादशम्भु-उमाका यह कल्याणकारी संवाद सुख उत्पन्न करनेवाला और शोकका नाश करनेवाला है। जन्म-मरणका अन्त करनेवाला, सन्देहोंका नाश करनेवाला, भक्तोंको आनन्द देनेवाला और संत पुरुषोंको प्रिय है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1044 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 यह सुभ संभु उमा संबादा। सुख संपादन समन बिषादा।।
English explanation
AI draft: This auspicious dialogue between Shiva and Uma brings happiness and dispels sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| सुभ | शुभ, मंगलमय | auspicious |
| संभु | शिव | Shiva |
| उमा | पार्वती | Uma, Parvati |
| संबादा | संवाद | dialogue |
| सुख | आनंद | happiness |
| संपादन | प्रदान करने वाला | bringing about |
| समन | मिटाने वाला | dispelling |
| बिषादा | विषाद, दुःख | sorrow |
2 भव भंजन गंजन संदेहा। जन रंजन सज्जन प्रिय एहा।।
English explanation
It destroys worldly bondage and doubt, delights people, and is dear to the virtuous.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार-बंधन | worldly bondage |
| भंजन | नष्ट करने वाला | destroying |
| गंजन | मिटाने वाला | dispelling |
| संदेहा | संदेह | doubts |
| जन | लोगों को | people |
| रंजन | आनंद देने वाला | delighting |
| सज्जन | सज्जनों को | to the virtuous |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| एहा | यह | this |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1044
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1044, 1047
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।