उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामु काम सत कोटि सुभग तन। दुर्गा कोटि अमित अरि मर्दन।।
मूल पाठ
रामु काम सत कोटि सुभग तन। दुर्गा कोटि अमित अरि मर्दन।।
सक्र कोटि सत सरिस बिलासा। नभ सत कोटि अमित अवकासा।।
स्रोत अभिलेख 7.91 · पुस्तक पृ. 993, 993
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीका अरबों कामदेवोंके समान सुन्दर शरीर है। वे अनन्त कोटि दुर्गाओंके समान शत्रुनाशक हैं। अरबों इन्द्रोंके समान उनका विलास (ऐश्वर्य) है। अरबों आकाशोंके समान उनमें अनन्त अवकाश (स्थान) है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 993 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रामु काम सत कोटि सुभग तन। दुर्गा कोटि अमित अरि मर्दन।।
English explanation
Rama’s form is as beautiful as a billion gods of love; in crushing enemies, his immeasurable might is like that of countless millions of Durgas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| काम | कामदेव | the god of love |
| सत | सौ | a hundred |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| तन | शरीर | form; body |
| दुर्गा | देवी दुर्गा | the goddess Durga |
| कोटि | करोड़ों | millions upon millions |
| अमित | अपरिमित | immeasurable |
| अरि | शत्रुओं का | of enemies |
| मर्दन | संहार करने वाले | crusher; destroyer |
2 सक्र कोटि सत सरिस बिलासा। नभ सत कोटि अमित अवकासा।।
English explanation
Rama’s majestic splendor is like that of a billion Indras; his immeasurable expanse is like a billion skies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सक्र | इंद्र | Indra, king of the gods |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| सत | सौ | a hundred |
| सरिस | के समान | like; equal to |
| बिलासा | ऐश्वर्यपूर्ण विलास | majestic splendor |
| नभ | आकाश | skies |
| सत | सौ | a hundred |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| अमित | अपरिमित | immeasurable |
| अवकासा | विस्तार; व्यापकता | expanse; vastness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.91
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 993
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 993, 993
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।