उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्हहि आदि खग मसक प्रजंता। नभ उड़ाहिं नहिं पावहिं अंता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआपसे लेकर मच्छरपर्यन्त सभी छोटे-बड़े जीव आकाशमें उड़ते हैं, किन्तु आकाशका अन्त कोई नहीं पाते। इसी प्रकार हे तात! श्रीरघुनाथजीकी महिमा भी अथाह है। क्या कभी कोई उसकी थाह पा सकता है?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 993 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्हहि आदि खग मसक प्रजंता। नभ उड़ाहिं नहिं पावहिं अंता।।
तिमि रघुपति महिमा अवगाहा। तात कबहुँ कोउ पाव कि थाहा।।
स्रोत अभिलेख 7.91 · पुस्तक पृ. 993, 993
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुम्हहि आदि खग मसक प्रजंता। नभ उड़ाहिं नहिं पावहिं अंता।।
English explanation
All winged creatures, from you down to a mosquito, fly in the sky but never reach its end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हहि | तुमसे ही; तुम गरुड़ से | from you, Garuda |
| आदि | आरंभ करके | beginning with |
| खग | पक्षी; उड़ने वाले जीव | birds; winged creatures |
| मसक | मच्छर | a mosquito |
| प्रजंता | तक | as far as; down to |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| उड़ाहिं | उड़ते हैं | fly |
| नहिं | नहीं | not |
| पावहिं | पाते हैं | reach |
| अंता | अंत | the end |
2 तिमि रघुपति महिमा अवगाहा। तात कबहुँ कोउ पाव कि थाहा।।
English explanation
Likewise, Rama’s glory is unfathomable. Dear one, can anyone ever fathom it?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिमि | उसी प्रकार | likewise |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| महिमा | महिमा | glory |
| अवगाहा | अथाह; अत्यंत गहरी | unfathomably deep |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| कबहुँ | कभी | ever |
| कोउ | कोई | anyone |
| पाव | पा सकता है | can attain |
| कि | क्या | can; whether |
| थाहा | थाह; गहराई का ज्ञान | the measure of its depth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.91
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 993
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 993, 993
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।