उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
महिमा नाम रूप गुन गाथा। सकल अमित अनंत रघुनाथा।।
मूल पाठ
महिमा नाम रूप गुन गाथा। सकल अमित अनंत रघुनाथा।।
निज निज मति मुनि हरि गुन गावहिं। निगम सेष सिव पार न पावहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.91 · पुस्तक पृ. 993, 993
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीकी महिमा, नाम, रूप और गुणोंकी कथा सभी अपार एवं अनन्त हैं तथा श्रीरघुनाथजी स्वयं भी अनन्त हैं। मुनिगण अपनी-अपनी बुद्धिके अनुसार श्रीहरिके गुण गाते हैं। वेद, शेष और शिवजी भी उनका पार नहीं पाते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 993 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 महिमा नाम रूप गुन गाथा। सकल अमित अनंत रघुनाथा।।
English explanation
Rama’s glory, names, forms, virtues, and stories are all immeasurable and endless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महिमा | महिमा | glory |
| नाम | नाम | names |
| रूप | रूप | forms |
| गुन | गुण | virtues |
| गाथा | कथाएँ | stories |
| सकल | सभी | all |
| अमित | अपरिमित | immeasurable |
| अनंत | अनंत | endless |
| रघुनाथा | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 निज निज मति मुनि हरि गुन गावहिं। निगम सेष सिव पार न पावहिं।।
English explanation
Sages sing Hari’s virtues according to their respective understanding; even the Vedas, Shesha, and Shiva cannot reach their limit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | their own |
| निज | अपनी-अपनी | each one’s respective |
| मति | बुद्धि के अनुसार | according to understanding |
| मुनि | मुनि | sages |
| हरि | हरि अर्थात प्रभु राम के | of Hari, here Lord Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| निगम | वेद | the Vedas |
| सेष | शेषनाग | Shesha, the divine serpent |
| सिव | शिव | Shiva |
| पार | अंत; सीमा | the end; the limit |
| न | नहीं | not |
| पावहिं | पाते हैं | reach |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.91
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 993
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 993, 993
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।