उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज मति सरिस नाथ मैं गाई। प्रभु प्रताप महिमा खगराई।।
मूल पाठ
निज मति सरिस नाथ मैं गाई। प्रभु प्रताप महिमा खगराई।।
कहेउँ न कछु करि जुगुति बिसेषी। यह सब मैं निज नयनन्हि देखी।।
स्रोत अभिलेख 7.91 · पुस्तक पृ. 993, 993
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पक्षिराज! हे नाथ! मैंने अपनी बुद्धिके अनुसार प्रभुके प्रताप और महिमाका गान किया। मैंने इसमें कोई बात युक्तिसे बढ़ाकर नहीं कही है। यह सब अपनी आँखों देखी कही है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 993 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज मति सरिस नाथ मैं गाई। प्रभु प्रताप महिमा खगराई।।
English explanation
AI draft: O lord, O Garuda, king of birds! I have sung the glory of the Lord’s might according to my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | my own |
| मति | बुद्धि | understanding |
| सरिस | के अनुसार | according to |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| मैं | मैंने | I |
| गाई | गाई है | have sung |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| प्रताप | पराक्रम | might |
| महिमा | महिमा | glory |
| खगराई | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
2 कहेउँ न कछु करि जुगुति बिसेषी। यह सब मैं निज नयनन्हि देखी।।
English explanation
I have said nothing by devising some special argument; I have seen all this with my own eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउँ | मैंने कहा | I have said |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| करि | करके; गढ़कर | by making; by devising |
| जुगुति | युक्ति या तर्क | argument or reasoning |
| बिसेषी | विशेष | special |
| यह | यह | this |
| सब | सब | all |
| मैं | मैंने | I |
| निज | अपनी | my own |
| नयनन्हि | आँखों से | with my eyes |
| देखी | देखा है | have seen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.91
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 993
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 993, 993
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।