उत्तरकाण्ड · दोहा 90 (ख) · दोहा/सोरठा
अस बिचारि मतिधीर तजि कुतर्क संसय सकल।
अस बिचारि मतिधीर तजि कुतर्क संसय सकल।
भजहु राम रघुबीर करुनाकर सुंदर सुखद।।90(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.9 · पुस्तक पृ. 992, 992
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 अस बिचारि मतिधीर तजि कुतर्क संसय सकल।
हे स्थिरबुद्धि, ऐसा विचार करके और सभी कुतर्कों तथा संदेहों को छोड़कर—
English explanation
O steady-minded one, having considered this and abandoned all specious arguments and doubts—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| मतिधीर | हे स्थिरबुद्धि | O steady-minded one |
| तजि | त्यागकर | having abandoned |
| कुतर्क | भ्रामक तर्क | specious arguments |
| संसय | संदेह | doubts |
| सकल | सभी | all |
2 भजहु राम रघुबीर करुनाकर सुंदर सुखद।।90(ख)।।
करुणा के भंडार, सुंदर और सुख देने वाले रघुवंश के वीर राम का भजन करो।
English explanation
Worship Rama, the hero of Raghu’s lineage, the treasury of compassion, beautiful and bestowing happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भजहु | भजन करो | worship |
| राम | भगवान राम को | Lord Rama |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर | hero of Raghu’s lineage |
| करुनाकर | करुणा के भंडार | treasury of compassion |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सुखद | सुख देने वाले | bestowing happiness |
| ख | दोहा ९० के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of verse 90 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 90 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.9
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 992, 992
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