उत्तरकाण्ड · दोहा 91 (क) · दोहा
मरुत कोटि सत बिपुल बल रबि सत कोटि प्रकास।
मरुत कोटि सत बिपुल बल रबि सत कोटि प्रकास।
ससि सत कोटि सुसीतल समन सकल भव त्रास॥ ९१ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.91 · पुस्तक पृ. 993, 993
भावार्थ और शब्दार्थ
1मरुत कोटि सत बिपुल बल रबि सत कोटि प्रकास।
भगवान का बल सौ करोड़ पवनों के समान अपार है और उनका प्रकाश सौ करोड़ सूर्यों के समान है।
English explanation
The Lord’s immense strength is like that of a billion winds, and his radiance like that of a billion suns.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मरुत | पवन | winds |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| सत | सौ | a hundred |
| बिपुल | अपार; अत्यंत विशाल | immense; vast |
| बल | शक्ति | strength |
| रबि | सूर्य | suns |
| सत | सौ | a hundred |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| प्रकास | प्रकाश; तेज | radiance; brilliance |
2ससि सत कोटि सुसीतल समन सकल भव त्रास॥ ९१ (क)॥
वे सौ करोड़ चंद्रमाओं के समान अत्यंत शीतल हैं और संसार के समस्त भय को शांत करने वाले हैं।
English explanation
He is soothingly cool like a billion moons and dispels all fear of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ससि | चंद्रमा | moons |
| सत | सौ | a hundred |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| सुसीतल | अत्यंत शीतल और सुखद | deeply cool and soothing |
| समन | शांत करने वाले; दूर करने वाले | dispeller; one who allays |
| सकल | समस्त | all |
| भव | संसार; जन्म-मरण का अस्तित्व | worldly existence; the cycle of birth and death |
| त्रास | भय | fear; dread |
| क | दोहा ९१ का भाग-सूचक ‘क’ | reference marker for part (a) of verse 91 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 91 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.91
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 993, 993
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।