उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामहि भजहिं तात सिव धाता। नर पावँर कै केतिक बाता।।
मूल पाठ
रामहि भजहिं तात सिव धाता। नर पावँर कै केतिक बाता।।
जासु चरन अज सिव अनुरागी। तातु द्रोहँ सुख चहसि अभागी।।
स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! शिवजी और ब्रह्माजी भी श्रीरामजीको भजते हैं [फिर] नीच मनुष्यकी तो बात ही कितनी है? ब्रह्माजी और शिवजी जिनके चरणोंके प्रेमी हैं, अरे अभागे! उनसे द्रोह करके तू सुख चाहता है?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1008 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रामहि भजहिं तात सिव धाता। नर पावँर कै केतिक बाता।।
English explanation
Son, Shiva and Brahma worship Rama; what need is there to speak of a lowly mortal!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को ही | Rama himself |
| भजहिं | भजते हैं | worship |
| तात | हे पुत्र | O son |
| सिव | शिव | Shiva |
| धाता | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| नर | मनुष्य | mortal |
| पावँर | तुच्छ | lowly |
| कै | की | of |
| केतिक | कितनी; क्या ही | how much; what need |
| बाता | बात | mention |
2 जासु चरन अज सिव अनुरागी। तातु द्रोहँ सुख चहसि अभागी।।
English explanation
You seek happiness by opposing the very one whose feet Brahma and Shiva love, unfortunate one! (The reading ‘तातु’ is uncertain.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनके | whose |
| चरन | चरणों के | feet |
| अज | अजन्मा ब्रह्मा | Brahma, the unborn |
| सिव | शिव | Shiva |
| अनुरागी | प्रेमी हैं | are devoted lovers of |
| तातु | उनके प्रति; यहाँ राम के विरुद्ध। | Against him; here, against Rama. |
| द्रोहँ | द्रोह करके | through hostility |
| सुख | सुख | happiness |
| चहसि | तू चाहता है | you seek |
| अभागी | हे अभागे | O unfortunate one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1008
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।