उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हर कहुँ हरि सेवक गुर कहेऊ। सुनि खगनाथ हृदय मम दहेऊ।।
मूल पाठ
हर कहुँ हरि सेवक गुर कहेऊ। सुनि खगनाथ हृदय मम दहेऊ।।
अधम जाति मैं बिद्या पाएँ। भयउँ जथा अहि दूध पिआएँ।।
स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुरुजीने शिवजीको हरिका सेवक कहा। यह सुनकर हे पक्षिराज! मेरा हृदय जल उठा। नीच जातिका मैं विद्या पाकर ऐसा हो गया जैसे दूध पिलानेसे साँप॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1008 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हर कहुँ हरि सेवक गुर कहेऊ। सुनि खगनाथ हृदय मम दहेऊ।।
English explanation
My teacher called Shiva a servant of Hari; hearing this, O lord of birds, my heart burned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हर | शिव को | Shiva |
| कहुँ | को | as the object |
| हरि | हरि के; विष्णु अथवा राम के | of Hari, Vishnu or Rama |
| सेवक | सेवक | servant |
| गुर | गुरु ने | the teacher |
| कहेऊ | कहा | called |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| खगनाथ | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, lord of birds |
| हृदय | हृदय | heart |
| मम | मेरा | my |
| दहेऊ | जल उठा | burned |
2 अधम जाति मैं बिद्या पाएँ। भयउँ जथा अहि दूध पिआएँ।।
English explanation
I, of lowly birth, became upon gaining learning like a snake fed with milk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अधम | नीच; अधम | lowly |
| जाति | जन्म-समुदाय का | of birth or caste |
| मैं | मैं | I |
| बिद्या | विद्या | learning |
| पाएँ | पाने पर | upon receiving |
| भयउँ | हो गया | became |
| जथा | जैसे | like |
| अहि | साँप | a snake |
| दूध | दूध | milk |
| पिआएँ | पिलाए जाने पर | when fed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1008
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
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