उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मानी कुटिल कुभाग्य कुजाती। गुर कर द्रोह करउँ दिनु राती।।
मूल पाठ
मानी कुटिल कुभाग्य कुजाती। गुर कर द्रोह करउँ दिनु राती।।
अति दयाल गुर स्वल्प न क्रोधा। पुनि पुनि मोहि सिखाव सुबोधा।।
स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
भावार्थ
मूल पाठ के बादअभिमानी, कुटिल, दुर्भाग्य और कुजाति मैं दिन-रात गुरुजीसे द्रोह करता। गुरुजी अत्यन्त दयालु थे, उनको थोड़ा-सा भी क्रोध नहीं आता। [मेरे द्रोह करनेपर भी] वे बार-बार मुझे उत्तम ज्ञानकी ही शिक्षा देते थे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1008 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मानी कुटिल कुभाग्य कुजाती। गुर कर द्रोह करउँ दिनु राती।।
English explanation
Proud, crooked, ill-fated, and of base birth, I acted against my teacher day and night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानी | अहंकारी | proud |
| कुटिल | कुटिल | crooked |
| कुभाग्य | दुर्भाग्यवान | ill-fated |
| कुजाती | निकृष्ट जन्म वाला | of base birth |
| गुर | गुरु के प्रति | the teacher |
| कर | के प्रति | against |
| द्रोह | द्रोह | hostility |
| करउँ | मैं करता था | I practiced |
| दिनु | दिन | day |
| राती | रात | night |
2 अति दयाल गुर स्वल्प न क्रोधा। पुनि पुनि मोहि सिखाव सुबोधा।।
English explanation
My deeply compassionate teacher showed not the slightest anger and repeatedly taught me sound understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | extremely |
| दयाल | दयालु | compassionate |
| गुर | गुरु | the teacher |
| स्वल्प | तनिक भी | even slightly |
| न | नहीं | not |
| क्रोधा | क्रोध करते थे | became angry |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| मोहि | मुझे | me |
| सिखाव | सिखाते थे | taught |
| सुबोधा | अच्छी समझ | sound understanding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1008
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।