उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहि ते नीच बड़ाई पावा। सो प्रथमहिं हति ताहि नसावा।।
मूल पाठ
जेहि ते नीच बड़ाई पावा। सो प्रथमहिं हति ताहि नसावा।।
धूम अनल संभव सुनु भाई। तेहि बुझाव घन पदवी पाई।।
स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
भावार्थ
मूल पाठ के बादनीच मनुष्य जिससे बड़ाई पाता है, वह सबसे पहले उसीको मारकर उसीका नाश करता है। हे भाई! सुनिये, आगसे उत्पन्न हुआ धुआँ मेघकी पदवी पाकर उसी अग्रिको बुझा देता है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1009 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जेहि ते नीच बड़ाई पावा। सो प्रथमहिं हति ताहि नसावा।।
English explanation
A base person first strikes and ruins the very one from whom he gained eminence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिससे | whom |
| ते | से | from |
| नीच | नीच व्यक्ति | a base person |
| बड़ाई | बड़प्पन; प्रतिष्ठा | eminence |
| पावा | पाता है | obtains |
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| प्रथमहिं | सबसे पहले ही | first of all |
| हति | आघात करके | having struck |
| ताहि | उसी को | that very benefactor |
| नसावा | नष्ट करता है | ruins |
2 धूम अनल संभव सुनु भाई। तेहि बुझाव घन पदवी पाई।।
English explanation
Listen, brother: smoke arises from fire, yet on attaining the status of a cloud it extinguishes that very fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धूम | धुआँ | smoke |
| अनल | अग्नि से | from fire |
| संभव | उत्पन्न | born |
| सुनु | सुनो | listen |
| भाई | हे भाई | O brother |
| तेहि | उसी अग्नि को | that very fire |
| बुझाव | बुझाता है | extinguishes |
| घन | बादल की | of a cloud |
| पदवी | पदवी; स्थिति | status |
| पाई | पाकर | having attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1009
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
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