उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रज मग परी निरादर रहई। सब कर पद प्रहार नित सहई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दधूल रास्तेमें निरादरसे पड़ी रहती है और सदा सब [राह चलनेवालों] के लातोंकी मार सहती है। पर जब पवन उसे उड़ाता (ऊँचा उठाता) है, तो सबसे पहले वह उसी (पवन) को भर देती है और फिर राजाओंके नेत्रों और किरीटों (मुकुटों) पर पड़ती है॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1009 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रज मग परी निरादर रहई। सब कर पद प्रहार नित सहई।।
मरुत उड़ाव प्रथम तेहि भरई। पुनि नृप नयन किरीटन्हि परई।।
स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रज मग परी निरादर रहई। सब कर पद प्रहार नित सहई।।
English explanation
Dust lies neglected on the road and continually bears the blows of everyone’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रज | धूल | dust |
| मग | रास्ते में | on the road |
| परी | पड़ी | lying |
| निरादर | उपेक्षित | disregarded |
| रहई | रहती है | remains |
| सब | सबके | everyone |
| कर | के | of |
| पद | पैरों के | feet |
| प्रहार | प्रहार | blows |
| नित | सदा | continually |
| सहई | सहती है | endures |
2 मरुत उड़ाव प्रथम तेहि भरई। पुनि नृप नयन किरीटन्हि परई।।
English explanation
The wind lifts the dust; it first fills that very wind, then falls upon kings’ eyes and crowns.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मरुत | हवा | the wind |
| उड़ाव | उड़ाती है | lifts into the air |
| प्रथम | पहले | first |
| तेहि | उसी हवा को | that very wind |
| भरई | भर देती है | fills |
| पुनि | फिर | then |
| नृप | राजाओं के | kings’ |
| नयन | नेत्रों में | in the eyes |
| किरीटन्हि | मुकुटों पर | upon crowns |
| परई | पड़ती है | falls |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1009
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।