उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु खगपति अस समुझि प्रसंगा। बुध नहिं करहिं अधम कर संगा।।
मूल पाठ
सुनु खगपति अस समुझि प्रसंगा। बुध नहिं करहिं अधम कर संगा।।
कबि कोबिद गावहिं असि नीती। खल सन कलह न भल नहिं प्रीती।।
स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पक्षिराज गरुडज़ी! सुनिये, ऐसी बात समझकर बुद्धिमान् लोग अधम (नीच) का संग नहीं करते। कवि और पण्डित ऐसी नीति कहते हैं कि दुष्टसे न कलह ही अच्छा है, न प्रेम ही॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1009 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु खगपति अस समुझि प्रसंगा। बुध नहिं करहिं अधम कर संगा।।
English explanation
Listen, lord of birds: understanding such situations, wise people do not associate with the base.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| खगपति | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, lord of birds |
| अस | ऐसे | such |
| समुझि | समझकर | understanding |
| प्रसंगा | प्रसंगों को | situations |
| बुध | बुद्धिमान लोग | wise people |
| नहिं | नहीं | not |
| करहिं | करते हैं | engage in |
| अधम | अधम व्यक्तियों | base people |
| कर | की | with |
| संगा | संगति | association |
2 कबि कोबिद गावहिं असि नीती। खल सन कलह न भल नहिं प्रीती।।
English explanation
Poets and learned people proclaim this rule: neither conflict nor friendship with the wicked is good.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबि | कवि | poets |
| कोबिद | विद्वान | learned people |
| गावहिं | गाते; कहते हैं | proclaim |
| असि | ऐसी | such |
| नीती | नीति | rule of conduct |
| खल | दुष्ट व्यक्ति | a wicked person |
| सन | के साथ | with |
| कलह | झगड़ा | conflict |
| न | नहीं | not |
| भल | अच्छा | good |
| नहिं | न ही | nor |
| प्रीती | प्रेम; मित्रता | affection or friendship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1009
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।