उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उदासीन नित रहिअ गोसाईं। खल परिहरिअ स्वान की नाईं।।
मूल पाठ
उदासीन नित रहिअ गोसाईं। खल परिहरिअ स्वान की नाईं।।
मैं खल हृदयँ कपट कुटिलाई। गुर हित कहइ न मोहि सोहाई।।
स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे गोसाईं! उससे तो सदा उदासीन ही रहना चाहिये। दुष्टको कुत्तेकी तरह दूरसे ही त्याग देना चाहिये। मैं दुष्ट था, हृदयमें कपट और कुटिलता भरी थी। [इसीलिये यद्यपि] गुरुजी हितकी बात कहते थे, पर मुझे वह सुहाती न थी॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1009 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उदासीन नित रहिअ गोसाईं। खल परिहरिअ स्वान की नाईं।।
English explanation
My lord, one should always remain detached and avoid the wicked as one would a dog.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उदासीन | तटस्थ; अलग | detached |
| नित | सदा | always |
| रहिअ | रहना चाहिए | one should remain |
| गोसाईं | हे स्वामी | O lord |
| खल | दुष्ट को | the wicked |
| परिहरिअ | टालना; दूर रखना चाहिए | one should avoid |
| स्वान | कुत्ते | a dog |
| की | की | of |
| नाईं | भाँति | in the manner of |
2 मैं खल हृदयँ कपट कुटिलाई। गुर हित कहइ न मोहि सोहाई।।
English explanation
I was wicked, with deceit and crookedness in my heart. My teacher spoke for my good, but his words did not please me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| खल | दुष्ट | wicked |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| कपट | छल | deceit |
| कुटिलाई | कुटिलता | crookedness |
| गुर | गुरु | the teacher |
| हित | भलाई की बात | what benefits me |
| कहइ | कहते थे | said |
| न | नहीं | not |
| मोहि | मुझे | to me |
| सोहाई | अच्छी लगती थी | was pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1009
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
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