उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक बार गुर लीन्ह बोलाई। मोहि नीति बहु भाँति सिखाई।।
मूल पाठ
एक बार गुर लीन्ह बोलाई। मोहि नीति बहु भाँति सिखाई।।
सिव सेवा कर फल सुत सोई। अबिरल भगति राम पद होई।।
स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
भावार्थ
मूल पाठ के बादएक बार गुरुजीने मुझे बुला लिया और बहुत प्रकारसे [परमार्थ] नीतिकी शिक्षा दी कि हे पुत्र! शिवजीकी सेवाका फल यही है कि श्रीरामजीके चरणोंमें प्रगाढ़ भक्ति हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1008 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एक बार गुर लीन्ह बोलाई। मोहि नीति बहु भाँति सिखाई।।
English explanation
Once my teacher called me and taught me right conduct in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | अवसर पर | occasion |
| गुर | गुरु ने | the teacher |
| लीन्ह | ले लिया | did take |
| बोलाई | बुलाकर | by calling |
| मोहि | मुझे | me |
| नीति | सदाचरण की शिक्षा | right conduct |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | ways |
| सिखाई | सिखाई | taught |
2 सिव सेवा कर फल सुत सोई। अबिरल भगति राम पद होई।।
English explanation
Son, the fruit of serving Shiva is this: unbroken devotion to Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | शिव की | Shiva |
| सेवा | सेवा | service |
| कर | का | of |
| फल | फल | fruit |
| सुत | हे पुत्र | O son |
| सोई | वही; यही | that very thing |
| अबिरल | अविच्छिन्न | unbroken |
| भगति | भक्ति | devotion |
| राम | भगवान राम के | Rama’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| होई | हो | may arise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1008
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।