उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मारग सोइ जा कहुँ जोइ भावा। पंडित सोइ जो गाल बजावा।।
मूल पाठ
मारग सोइ जा कहुँ जोइ भावा। पंडित सोइ जो गाल बजावा।।
मिथ्यारंभ दंभ रत जोई। ता कहुँ संत कहइ सब कोई।।
स्रोत अभिलेख 7.98 · पुस्तक पृ. 1000, 1000
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसको जो अच्छा लग जाय, वही मार्ग है। जो डींग मारता है, वही पण्डित है। जो मिथ्या आरम्भ करता (आडम्बर रचता) है और जो दम्भमें रत है, उसीको सब कोई संत कहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1000 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मारग सोइ जा कहुँ जोइ भावा। पंडित सोइ जो गाल बजावा।।
English explanation
Whatever pleases someone is taken as the right path. Whoever boasts is regarded as learned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मारग | मार्ग | path |
| सोइ | वही | that very one |
| जा | जिस व्यक्ति | whichever person |
| कहुँ | को | to |
| जोइ | जो भी | whatever |
| भावा | अच्छा लगा | pleased |
| पंडित | विद्वान | learned person |
| सोइ | वही | that very person |
| जो | जो | who |
| गाल | डींगें; बढ़-चढ़कर बातें | boastful talk |
| बजावा | हाँकता है | utters boastfully |
2 मिथ्यारंभ दंभ रत जोई। ता कहुँ संत कहइ सब कोई।।
English explanation
Everyone calls a person absorbed in false pretentious undertakings and hypocrisy a saint.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिथ्यारंभ | झूठे, आडंबरपूर्ण उपक्रम | false, pretentious undertakings |
| दंभ | पाखंड; दिखावा | hypocrisy; pretence |
| रत | लगा हुआ | absorbed in |
| जोई | जो कोई | whoever |
| ता | उस व्यक्ति | that person |
| कहुँ | को | as; to |
| संत | संत | saint |
| कहइ | कहता है | calls |
| सब | हर | every |
| कोई | व्यक्ति | person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1000
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1000, 1000
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