उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मन बच क्रम मोहि निज जन जाना। मुनि मति पुनि फेरी भगवाना।।
मूल पाठ
मन बच क्रम मोहि निज जन जाना। मुनि मति पुनि फेरी भगवाना।।
रिषि मम महत सीलता देखी। राम चरन बिस्वास बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
भावार्थ
मूल पाठ के बादमन, वचन और कर्मसे जब प्रभुने मुझे अपना दास जान लिया, तब भगवान्ने मुनिकी बुद्धि फिर पलट दी। ऋषिने मेरा महान् पुरुषोंका-सा स्वभाव (धैर्य, अक्रोध, विनय आदि) और श्रीरामजीके चरणोंमें विशेष विश्वास देखा,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1020 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मन बच क्रम मोहि निज जन जाना। मुनि मति पुनि फेरी भगवाना।।
English explanation
The Lord recognized me as his own devotee in thought, speech, and deed, and then changed the sage’s understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | in thought |
| बच | वचन से | in speech |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| मोहि | मुझे | me |
| निज | अपना | his own |
| जन | भक्त, सेवक | devotee, servant |
| जाना | जाना, पहचाना | recognized |
| मुनि | मुनि की | the sage’s |
| मति | बुद्धि | understanding |
| पुनि | फिर | then, again |
| फेरी | बदल दी | changed |
| भगवाना | भगवान राम ने | Lord Rama |
2 रिषि मम महत सीलता देखी। राम चरन बिस्वास बिसेषी।।
English explanation
The sage saw my great gentleness and exceptional faith in Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिषि | ऋषि ने | the sage |
| मम | मेरी | my |
| महत | महान | great |
| सीलता | शीलता, सौम्य स्वभाव | gentleness, good character |
| देखी | देखी | saw |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों में | in the feet of |
| बिस्वास | विश्वास | faith |
| बिसेषी | विशेष, गहरा | exceptional, deep |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1020
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।