उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति बिसमय पुनि पुनि पछिताई। सादर मुनि मोहि लीन्ह बोलाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब मुनिने बहुत दु:खके साथ बार-बार पछताकर मुझे आदरपूर्वक बुला लिया। उन्होंने अनेकों प्रकारसे मेरा सन्तोष किया और तब हर्षित होकर मुझे राममन्त्र दिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1020 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति बिसमय पुनि पुनि पछिताई। सादर मुनि मोहि लीन्ह बोलाई।।
मम परितोष बिबिध बिधि कीन्हा। हरषित राममंत्र तब दीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अति बिसमय पुनि पुनि पछिताई। सादर मुनि मोहि लीन्ह बोलाई।।
English explanation
Greatly astonished and repeatedly remorseful, the sage respectfully called me back.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | greatly |
| बिसमय | आश्चर्य में | astonished |
| पुनि | बार | again |
| पुनि | बार | and again |
| पछिताई | पछताकर | feeling remorse |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| मोहि | मुझे | me |
| लीन्ह | लिया | did |
| बोलाई | बुलाकर | calling |
2 मम परितोष बिबिध बिधि कीन्हा। हरषित राममंत्र तब दीन्हा।।
English explanation
The sage reassured me in various ways and then joyfully gave me the Rama mantra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरा | my |
| परितोष | संतोष, तसल्ली | satisfaction, reassurance |
| बिबिध | विविध | various |
| बिधि | रीतियों से | in ways |
| कीन्हा | किया | provided |
| हरषित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| राममंत्र | राम का मंत्र | mantra of Rama |
| तब | तब | then |
| दीन्हा | दिया | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1020
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।