उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बालकरूप राम कर ध्याना। कहेउ मोहि मुनि कृपानिधाना।।
मूल पाठ
बालकरूप राम कर ध्याना। कहेउ मोहि मुनि कृपानिधाना।।
सुंदर सुखद मिहि अति भावा। सो प्रथमहिं मैं तुम्हहि सुनावा।।
स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
भावार्थ
मूल पाठ के बादकृपानिधान मुनिने मुझे बालकरूप श्रीरामजीका ध्यान (ध्यानकी विधि) बतलाया। सुन्दर और सुख देनेवाला यह ध्यान मुझे बहुत ही अच्छा लगा। वह ध्यान मैं आपको पहले ही सुना चुका हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1020 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बालकरूप राम कर ध्याना। कहेउ मोहि मुनि कृपानिधाना।।
English explanation
The compassionate sage taught me meditation on Rama’s child form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालकरूप | बालक के रूप वाले | in child form |
| राम | राम | Rama |
| कर | का | of |
| ध्याना | ध्यान | meditation |
| कहेउ | बताया | taught, described |
| मोहि | मुझे | to me |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार | treasury of compassion |
2 सुंदर सुखद मिहि अति भावा। सो प्रथमहिं मैं तुम्हहि सुनावा।।
English explanation
That beautiful, bliss-giving meditation greatly pleased me; I have already related it to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सुखद | सुख देने वाला | bliss-giving |
| मिहि | मुझे | to me |
| अति | बहुत | greatly |
| भावा | प्रिय लगा | pleased |
| सो | वही | that very thing |
| प्रथमहिं | पहले ही | already, earlier |
| मैं | मैंने | I |
| तुम्हहि | तुम्हें | to you |
| सुनावा | सुनाया | related |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1020
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।