उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि मोहि कछुक काल तहँ राखा। रामचरितमानस तब भाषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुनिने कुछ समयतक मुझको वहाँ (अपने पास) रखा। तब उन्होंने रामचरितमानस वर्णन किया। आदरपूर्वक मुझे यह कथा सुनाकर फिर मुनि मुझसे सुन्दर वाणी बोले—॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1020 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनि मोहि कछुक काल तहँ राखा। रामचरितमानस तब भाषा।।
सादर मोहि यह कथा सुनाई। पुनि बोले मुनि गिरा सुहाई।।
स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि मोहि कछुक काल तहँ राखा। रामचरितमानस तब भाषा।।
English explanation
The sage kept me there for some time and then recounted the lake of Rama’s deeds, the Ramcharitmanas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| मोहि | मुझे | me |
| कछुक | कुछ | some |
| काल | समय | time |
| तहँ | वहाँ | there |
| राखा | रखा | kept |
| रामचरितमानस | रामचरित का मानस-सरोवर, रामकथा | the lake of Rama’s deeds, the Rama narrative |
| तब | तब | then |
| भाषा | कहा, वर्णन किया | recounted |
2 सादर मोहि यह कथा सुनाई। पुनि बोले मुनि गिरा सुहाई।।
English explanation
The sage respectfully narrated this story to me, then spoke these pleasing words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| मोहि | मुझे | to me |
| यह | यह | this |
| कथा | कथा | story |
| सुनाई | सुनाई | narrated |
| पुनि | फिर | then |
| बोले | बोले | spoke |
| मुनि | मुनि | the sage |
| गिरा | वाणी | words, speech |
| सुहाई | सुंदर, मनोहर | pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1020
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
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