उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामचरित सर गुप्त सुहावा। संभु प्रसाद तात मैं पावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे तात! यह सुन्दर और गुप्त रामचरितमानस मैंने शिवजीकी कृपासे पाया था। तुम्हें श्रीरामजीका 'निज भक्त जाना, इसीसे मैंने तुमसे सब चरित्र विस्तारके साथ कहा॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1021 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रामचरित सर गुप्त सुहावा। संभु प्रसाद तात मैं पावा।।
तोहि निज भगत राम कर जानी। ताते मैं सब कहेउँ बखानी।।
स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रामचरित सर गुप्त सुहावा। संभु प्रसाद तात मैं पावा।।
English explanation
Dear one, I obtained this hidden, beautiful lake of Rama’s deeds through Shiva’s grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामचरित | राम के चरित्र का | of Rama’s deeds |
| सर | सरोवर | lake |
| गुप्त | गुप्त | hidden |
| सुहावा | सुंदर | beautiful |
| संभु | शिव की | Shiva’s |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| मैं | मैंने | I |
| पावा | प्राप्त किया | obtained |
2 तोहि निज भगत राम कर जानी। ताते मैं सब कहेउँ बखानी।।
English explanation
Knowing you to be Rama’s own true devotee, I therefore explained everything in detail.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोहि | तुम्हें | you |
| निज | अपना, आत्मीय | own, devoted |
| भगत | भक्त | devotee |
| राम | राम | Rama |
| कर | का | of |
| जानी | जानकर | knowing |
| ताते | इसलिए | therefore |
| मैं | मैंने | I |
| सब | सब | everything |
| कहेउँ | कहा | told |
| बखानी | विस्तार से समझाकर | explaining in detail |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1021
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।