उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु खगेस नहिं कछु रिषि दूषन। उर प्रेरक रघुबंस बिभूषन।।
मूल पाठ
सुनु खगेस नहिं कछु रिषि दूषन। उर प्रेरक रघुबंस बिभूषन।।
कृपासिंधु मुनि मति करि भोरी। लीन्हि प्रेम परिच्छा मोरी।।
स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[काकभुशुण्डिजीने कहा—] हे पक्षिराज गरुडज़ी! सुनिये, इसमें ऋषिका कुछ भी दोष नहीं था। रघुवंशके विभूषण श्रीरामजी ही सबके हृदयमें प्रेरणा करनेवाले हैं। कृपासागर प्रभुने मुनिकी बुद्धिको भोली करके (भुलावा देकर) मेरे प्रेमकी परीक्षा ली॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1020 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु खगेस नहिं कछु रिषि दूषन। उर प्रेरक रघुबंस बिभूषन।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Listen, king of birds! The sage is not at fault; Rama, the glory of Raghu’s lineage, is the mover of the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | any at all |
| रिषि | ऋषि का | of the sage |
| दूषन | दोष | fault |
| उर | हृदय के | of the heart |
| प्रेरक | प्रेरणा देने वाले | the mover |
| रघुबंस | रघुवंश के | of Raghu’s lineage |
| बिभूषन | भूषण, राम | glory, Rama |
2 कृपासिंधु मुनि मति करि भोरी। लीन्हि प्रेम परिच्छा मोरी।।
English explanation
Rama, the ocean of compassion, clouded the sage’s understanding and tested my love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृपासिंधु | कृपा के सागर राम | Rama, ocean of compassion |
| मुनि | मुनि की | the sage’s |
| मति | बुद्धि | understanding |
| करि | करके | having made |
| भोरी | भोली, भ्रमित | uncomprehending, clouded |
| लीन्हि | ली | undertook |
| प्रेम | प्रेम की | of love |
| परिच्छा | परीक्षा | test |
| मोरी | मेरी | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1020
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।