उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मन कामना सिद्धि नर पावा। जे यह कथा कपट तजि गावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो कपट छोड़कर यह कथा गाते हैं, वे मनुष्य अपनी मन:कामनाकी सिद्धि पा लेते हैं। जो इसे कहते-सुनते और अनुमोदन (प्रशंसा) करते हैं, वे संसाररूपी समुद्रको गौके खुरसे बने हुए गड्ढेकी भाँति पार कर जाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1044 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मन कामना सिद्धि नर पावा। जे यह कथा कपट तजि गावा।।
कहहिं सुनहिं अनुमोदन करहीं। ते गोपद इव भवनिधि तरहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.129 · पुस्तक पृ. 1043, 1044
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मन कामना सिद्धि नर पावा। जे यह कथा कपट तजि गावा।।
English explanation
A person who sings this story, abandoning deceit, attains the fulfillment of the heart’s desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन की | of the heart |
| कामना | इच्छा | desire |
| सिद्धि | पूर्ति | fulfillment |
| नर | मनुष्य | a person |
| पावा | पाता है | attains |
| जे | जो | who |
| यह | यह | this |
| कथा | कथा | story |
| कपट | छल-कपट | deceit |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| गावा | गाता है | sings |
2 कहहिं सुनहिं अनुमोदन करहीं। ते गोपद इव भवनिधि तरहीं।।
English explanation
Those who recount it, listen to it, and approvingly rejoice in it cross the ocean of worldly existence as though it were a little hollow made by a cow’s hoof.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | recount |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| अनुमोदन | प्रसन्नतापूर्वक समर्थन | joyful approval |
| करहीं | करते हैं | offer |
| ते | वे | they |
| गोपद | गाय के खुर का छोटा गड्ढा | a small hollow made by a cow’s hoof |
| इव | के समान | as though; like |
| भवनिधि | संसार-सागर | the ocean of worldly existence |
| तरहीं | पार करते हैं | cross |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.129
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1044
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1043, 1044
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।