उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि महँ रुचिर सप्त सोपाना। रघुपति भगति केर पंथाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइसमें सात सुन्दर सीढिय़ाँ हैं, जो श्रीरघुनाथजीकी भक्तिको प्राप्त करनेके मार्ग हैं। जिसपर श्रीहरिकी अत्यन्त कृपा होती है, वही इस मार्गपर पैर रखता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1044 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि महँ रुचिर सप्त सोपाना। रघुपति भगति केर पंथाना।।
अति हरि कृपा जाहि पर होई। पाउँ देइ एहिं मारग सोई।।
स्रोत अभिलेख 7.129 · पुस्तक पृ. 1043, 1044
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि महँ रुचिर सप्त सोपाना। रघुपति भगति केर पंथाना।।
English explanation
Within it are seven beautiful steps, which are paths to devotion to Rama, Lord of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस कथा में | in this story |
| महँ | में | within |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| सप्त | सात | seven |
| सोपाना | सोपान या सीढ़ियाँ | steps or stages |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, Lord of Raghu’s lineage |
| भगति | भक्ति | devotion |
| केर | के | of |
| पंथाना | मार्ग | paths |
2 अति हरि कृपा जाहि पर होई। पाउँ देइ एहिं मारग सोई।।
English explanation
Only one upon whom Hari bestows great grace sets foot on this path.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | great; abundant |
| हरि | भगवान हरि की | of Lord Hari |
| कृपा | कृपा | grace |
| जाहि | जिसके | whom |
| पर | ऊपर | upon |
| होई | होती है | is bestowed |
| पाउँ | पाँव | foot |
| देइ | रखता है | sets |
| एहिं | इस | this |
| मारग | मार्ग पर | on the path |
| सोई | वही | that very person alone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.129
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1044
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1043, 1044
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।