उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सब कथा हृदयँ अति भाई। गिरिजा बोली गिरा सुहाई।।
मूल पाठ
सुनि सब कथा हृदयँ अति भाई। गिरिजा बोली गिरा सुहाई।।
नाथ कृपाँ मम गत संदेहा। राम चरन उपजेउ नव नेहा।।
स्रोत अभिलेख 7.129 · पुस्तक पृ. 1043, 1044
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[याज्ञवल्क्यजी कहते हैं—] सब कथा सुनकर श्रीपार्वतीजीके हृदयको बहुत ही प्रिय लगी और वे सुन्दर वाणी बोलीं—स्वामीकी कृपासे मेरा सन्देह जाता रहा और श्रीरामजीके चरणोंमें नवीन प्रेम उत्पन्न हो गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1044 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सब कथा हृदयँ अति भाई। गिरिजा बोली गिरा सुहाई।।
English explanation
Having heard the whole story, Parvati found it deeply pleasing to her heart; she then spoke in lovely words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सब | सारी | the whole |
| कथा | कथा | story |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| अति | बहुत | very much |
| भाई | अच्छी लगी | was pleasing |
| गिरिजा | पार्वती | Parvati, Shiva’s consort |
| बोली | बोलीं | spoke |
| गिरा | वाणी | words; speech |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
2 नाथ कृपाँ मम गत संदेहा। राम चरन उपजेउ नव नेहा।।
English explanation
O Lord, through your grace my doubt has departed, and fresh love for Rama’s feet has arisen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी शिव | O Lord Shiva |
| कृपाँ | आपकी कृपा से | through your grace |
| मम | मेरा | my |
| गत | दूर हुआ | departed; gone |
| संदेहा | संदेह | doubt |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरन | चरणों के प्रति | toward the feet |
| उपजेउ | उत्पन्न हुआ | arose |
| नव | नया | fresh; new |
| नेहा | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.129
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1044
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1043, 1044
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