उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंदिर माझ भई नभ बानी। रे हतभाग्य अग्य अभिमानी।।
मूल पाठ
मंदिर माझ भई नभ बानी। रे हतभाग्य अग्य अभिमानी।।
जद्यपि तव गुर कें नहिं क्रोधा। अति कृपाल चित सम्यक बोधा।।
स्रोत अभिलेख 7.107 · पुस्तक पृ. 1010, 1010
भावार्थ
मूल पाठ के बादमन्दिरमें आकाशवाणी हुई कि अरे हतभाग्य! मूर्ख! अभिमानी! यद्यपि तेरे गुरुको क्रोध नहीं है, वे अत्यन्त कृपालु चित्तके हैं और उन्हें [पूर्ण तथा] यथार्थ ज्ञान है,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1010 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मंदिर माझ भई नभ बानी। रे हतभाग्य अग्य अभिमानी।।
English explanation
AI-generated draft meaning: A voice from the sky sounded within the temple: “O unfortunate, ignorant, arrogant one!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदिर | मंदिर के भीतर | within the temple |
| माझ | बीच में; भीतर | in the midst; inside |
| भई | हुई | arose |
| नभ | आकाश से | from the sky |
| बानी | वाणी | a voice |
| रे | अरे! | O! |
| हतभाग्य | अभागे | unfortunate one |
| अग्य | अज्ञानी | ignorant one |
| अभिमानी | अहंकारी | arrogant one |
2 जद्यपि तव गुर कें नहिं क्रोधा। अति कृपाल चित सम्यक बोधा।।
English explanation
Although your guru feels no anger—he is exceedingly compassionate and has true understanding in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| तव | तुम्हारे | your |
| गुर | गुरु | spiritual teacher |
| कें | को | to; in |
| नहिं | नहीं | not |
| क्रोधा | क्रोध | anger |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| चित | चित्त में | in his heart |
| सम्यक | यथार्थ; पूर्ण | true; complete |
| बोधा | ज्ञान; समझ | knowledge; understanding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1010
- सहायक विषय
- गुरुजीका अपमान एवं शिवजीके शापकी बात सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1010, 1010
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।