उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगत बछलता प्रभु कै देखी। उपजी मम उर प्रीति बिसेषी।।
मूल पाठ
भगत बछलता प्रभु कै देखी। उपजी मम उर प्रीति बिसेषी।।
सजल नयन पुलकित कर जोरी। कीन्हिउँ बहु बिधि बिनय बहोरी।।
स्रोत अभिलेख 7.83 · पुस्तक पृ. 985, 986
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुकी भक्तवत्सलता देखकर मेरे हृदयमें बहुत ही प्रेम उत्पन्न हुआ। फिर मैंने [आनन्दसे] नेत्रोंमें जल भरकर, पुलकित होकर और हाथ जोड़कर बहुत प्रकारसे विनती की॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 986 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भगत बछलता प्रभु कै देखी। उपजी मम उर प्रीति बिसेषी।।
English explanation
Seeing the Lord’s affection for his devotees, a special love arose in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगत | भक्तों के प्रति | toward devotees |
| बछलता | वात्सल्य; स्नेह | tender affection |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord Rama |
| कै | की | of; belonging to |
| देखी | देखकर | having seen |
| उपजी | उत्पन्न हुई | arose |
| मम | मेरे | my |
| उर | हृदय में | in the heart |
| प्रीति | प्रेम | love |
| बिसेषी | विशेष; अधिक गहरी | special; deeper |
2 सजल नयन पुलकित कर जोरी। कीन्हिउँ बहु बिधि बिनय बहोरी।।
English explanation
With tear-filled eyes and my body thrilled, I joined my hands and again offered humble entreaties in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| नयन | नेत्र | eyes |
| पुलकित | रोमांचित; रोम खड़े हुए | thrilled; with hair standing on end |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| कीन्हिउँ | मैंने की | I offered; I made |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| बिनय | विनम्र प्रार्थना | humble entreaty |
| बहोरी | फिर | again |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.83
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 986
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 985, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।